मसूड़ों की समस्याओं के कारण और उपचार || gum diseases causes and treatment
मसूड़ों में सूजन होना, उनका कमजोर पड़ना,
ब्रश करने के बाद खून आना, दांत हिलना और मुंह से लगातार दुर्गंध आना, ये
सभी मसूड़ों की समस्या के लक्षण हैं। इसे शुरुआती चरण में छुटकारा पाना
आसान है, लेकिन शुरू से अगर इलाज नहीं कराया जाता तो दुष्परिणाम दांत टूटने
और कई रोगों के रूप में सामने आ सकते हैं।
मसूड़ों की समस्या
मसूड़ों में सूजन होना, उनका कमजोर पड़ना, ब्रश करने के बाद खून
आना, दांत हिलना और मुंह से लगातार दुर्गंध आना, ये सभी मसूड़ों की समस्या
के लक्षण हैं। इसे शुरुआती चरण में छुटकारा पाना आसान है, लेकिन शुरू से
अगर इलाज नहीं कराया जाता तो दुष्परिणाम दांत टूटने और कई रोगों के रूप में
सामने आ सकते हैं। मसूड़ों में सूजन या खून आने जैसे किसी भी लक्षण को
हलके में नहीं लेना चाहिए। ये लक्षण मसूड़ों को नुकसान से बचाने के लिए
उपाय करने का संकेत दे रहे होते हैं।
मसूड़ों की समस्या के कारण
मसूड़ों की समस्या के बहुत से कारण हो सकते हैं लेकिन सबसे आम
कारण है मुंह की साफ-सफाई का ध्यान न रखना। नियमित रूप से दांत ब्रश न
करना, आपके दांतों में प्लाक पैदा कर सकता है। जब प्लाक को हटाया नहीं जाता
तो वो टार्टर बन जाता है, जिसे ब्रश साफ नहीं कर पाता। केवल एक प्रोफेशनल
क्लीनिंग के द्वारा ही इसे साफ किया जा सकता है। जब हम इसे साफ नहीं करवाते
तो इससे मसूड़ों की समस्या पैदा हो जाती हैं। इसके अलावा, धूम्रपान,
डायबिटीज, आनुवांशिक कारण, कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता भी मसूड़ों की
समस्या बन सकते हैं।
मसूड़ों की समस्या की पहली स्टेज
मसूड़ों की बीमारी की पहली स्टेज को गिंगिविटीज़ भी कहते हैं।
इसके लक्षण हैं - मसूड़ों का लाल होना, सूजन और दर्द, ब्रश करते समय
मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों का दांतों के ऊपर निकल जाना और लगातार सांस से
बदबू आना। प्रेगनेंट महिलाओं को हल्की गिंगिविटीज़ की समस्या होना आम बात
है। इसलिए उन्हें अपनी सेहत व दांतों का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए।
मसूड़ों की बीमारी की दूसरी स्टेज
मसूड़ों की बीमारी की दूसरी स्टेज बहुत गंभीर होती है। इसके कुछ
लक्षण हैं, मसूड़ों और दांतों के बीच मवाद बनना, दांतों का गिरना, दांतों व
मसूड़ों के बीच बहुत अंतर होना, खाने को काटते समय सभी दांतों की स्थिति
में बदलाव आना आदि।
मसूड़ों की समस्याओं के लिए उपचार
मसूड़ों की समस्या न हो, इसके लिए मुंह की सफाई रखनी सबसे जरूरी
है। लेकिन कई बार ध्यान रखने के बावजूद मसूड़ों की समस्याएं हो जाती हैं।
ऐसे में उपचार जरूरी हो जाता है। आइये जानते हैं मसूड़ों की समस्या में
कैसे और क्या उपचार होना चाहिए।
डेंटल ट्रीटमेंट
अगर आपको मसूड़ों की समस्या हो चुकी है तो कुछ डेंटल ट्रीटमेंट
आपको करवाने पड़ सकते हैं। दांतों से प्लाक और टार्टर हटाने के लिए आप
प्रोफेशनल क्लीनिंग करवा सकते हैं। कभी-कभी मसूड़ों की समस्या में रूट
प्लानिंग करवानी पड़ती हैं। इससे दांतों की जड़ से बैक्टीरिया साफ हो जाते
हैं।
एंटी बायोटिक्स और पेन किलर
मसूड़ों की समस्या में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स का परामर्श भी देते
हैं। मेट्रोनिडेजोल या एमोक्सिसिल्लिन जैसी एंटीबायोटिक्स तीन दिन तक खानी
पड़ सकती है। इसके अलावा दर्द की स्थिति में डॉक्टर द्वारा आमतौर पर
पैरासिटामोल और इबुफ्रोन दी जाती है।
घरेलू उपचार भी है मुमकिन
मसूड़ों की समस्याओं में कुछ घरेलू उपचार भी कारगर होते हैं।
आइये कुछ ऐसे ही घरेलू उपचारों के बारे में जानते हैं। आंवला जलाकर सरसों
के तेल में मिलाएं, इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें। इससे कुछ दिनों में
मसूड़ों की समस्या में आराम मिलने लगता है। नीम की पत्तियां, काली मिर्च और
काला नमक मिलाकर पीस लें, इसका नियमित सेवन करें। जीरा, सेंधा नमक, हरड़,
दालचीनी, दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें, इसे बंद बर्तन में जलाकर
पीस लें और इस मंजन का नियमित प्रयोग करें।
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